
कोरबा – औद्योगिक नगरी की पहचान सिर्फ कारखानों और उत्पादन से नहीं बनती, बल्कि उन लोगों से बनती है जो मजदूरों, गरीबों और वंचितों की आवाज़ बनकर समाज को दिशा देते हैं। ऐसे ही जननायक नवरंगलाल की 27वीं पुण्यतिथि पर पूरा क्षेत्र उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन कर रहा है।
नवरंग लाल का जीवन सेवा, संघर्ष और समर्पण का जीवंत उदाहरण रहा। उन्होंने अपने पूरे जीवन को मजदूरों और गरीब तबके के अधिकारों की लड़ाई के लिए समर्पित कर दिया। जब-जब श्रमिकों के अधिकारों पर संकट आया, तब-तब वे अग्रिम पंक्ति में खड़े दिखाई दिए। उनका व्यक्तित्व केवल एक नेता का नहीं, बल्कि एक संरक्षक, मार्गदर्शक और संघर्ष के प्रतीक का था।

औद्योगिक विकास के बीच अक्सर मजदूर वर्ग की समस्याएँ अनदेखी रह जाती हैं, लेकिन नवरंगलाल ने इन समस्याओं को अपनी आवाज़ दी। उन्होंने न सिर्फ श्रमिकों को संगठित किया, बल्कि उन्हें उनके अधिकारों के प्रति जागरूक भी किया। उनके नेतृत्व में मजदूरों को न्याय दिलाने की कई ऐतिहासिक पहल हुईं, जिनका प्रभाव आज भी समाज में महसूस किया जाता है।
वे सिर्फ मजदूरों के नेता नहीं थे, बल्कि गरीबों के मसीहा के रूप में भी जाने जाते रहे। समाज के हर कमजोर वर्ग के लिए उनके दरवाजे हमेशा खुले रहते थे। अन्याय के खिलाफ उनका संघर्ष और सत्य के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें जन-जन का प्रिय बनाती रही। यही कारण है कि उनके जाने के वर्षों बाद भी उनकी स्मृतियाँ लोगों के दिलों में जीवित हैं।

आज, उनकी पुण्यतिथि पर यह स्मरण करना जरूरी है कि समाज को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे ही समर्पित नेतृत्व की आवश्यकता है। उनका जीवन हमें यह संदेश देता है कि सच्चा नेतृत्व वही है, जो खुद से पहले समाज और जरूरतमंदों को प्राथमिकता देता है।
नवरंगलाल भले ही हमारे बीच शारीरिक रूप से मौजूद नहीं हैं, लेकिन हर इंसाफ़ की लड़ाई, हर श्रमिक की आवाज़ और हर सामाजिक संघर्ष में उनकी प्रेरणा आज भी जीवित है। यही उनकी सबसे बड़ी विरासत है, जो आने वाली पीढ़ियों को संघर्ष और सेवा के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेगी।







